सरकारी बजट से सफाई, फिर भी जंगल से बाहर कीमती लकड़ी!
पीपल पड़ाओ रेंज में पकड़ी गई तीन पिकअप ने खोली बड़े खेल की परतें
तराई केंद्रीय वन प्रभाग में ठेकेदार-अधिकारी गठजोड़ पर उठे गंभीर सवाल, दिन-रात निकल रही लकड़ी
रुद्रपुर। तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर अंतर्गत पीपल पड़ाओ रेंज में इन दिनों प्लॉट सफाई के नाम पर जंगलों में बड़े खेल की चर्चाएं तेज है आपको बतादेकि उत्तर प्रदेश के स्वार क्षेत्र के ठेकेदार ट्रैक्टर-ट्रॉली और पिकअप वाहनों के साथ जंगल क्षेत्र में पहुंचते हैं और जलौनी व सौकते की आड़ में कीमती लकड़ियों को बाहर निकाल रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार प्लॉट सफाई के लिए अलग से बजट देती है, तो फिर अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से जंगल से कीमती लकड़ी बाहर क्यों जा रही है?
सूत्रों और स्थानीय जब से उमेश चन्द तिवारी ने तराई केंद्रीय वन प्रभाग की कमान संभाली है, तभी से उत्तर प्रदेश से जुड़े वन तस्करों के हौसले और ज्यादा बुलंद हुए हैं। तराई की भाखड़ा व हल्द्वानी रेंजों में झाड़ी व प्लॉट सफाई की आड़ में करोड़ों रुपये का काला खेल चल रहा है और वन तस्करी का अवैध धंधा खुलकर फल-फूल रहा है। दिनाँक 8 मार्च 2026 को हल्द्वानी रेंज से निकली 3 ट्रैक्टर ट्रालीय भी रुद्रपुर रेंज ने पकड़ी थी
बताया जा रहा है कि हरिपुरा जलाशय के बैराज पर स्थित पीपल पढ़ाव वन क्षेत्र की वन चैक पोस्ट चौकी के सामने से ही दिन और रात में पिकअप जैसे वाहनों से भारी मात्रा में लकड़ी लाई जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हरे पेड़ों को अवैध रूप से काटकर उन्हें टाटा 407 जैसी गाड़ियों में भरकर “जंगल सफाई” का नाम दिया जाता है, जबकि असल में यह कीमती वन सम्पदा को उत्तर प्रदेश भेजने का सुनियोजित खेल है।
मामला 14 मार्च 2026 की शाम का बताया जा रहा है, जब पीपल पड़ाओ रेंज से लकड़ी से भरी तीन पिकअप निकलती देख पर्यावरण प्रेमियों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही रुद्रपुर रेंज की टीम सक्रिय हुई और मसीत मोड़ पर पुल के पास तीनों वाहनों को रोक घंटों की मशक्कत के बाद वन विभाग की टीम ने तीनों वाहनों को रोक ने मै सफलता मिली
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह सब अवैध नहीं था, तो लकड़ी से भरे वाहन रात के समय किस आदेश पर निकाले जा रहे थे? यदि प्लॉट सफाई ही हो रही थी, तो लकड़ी की मात्रा, वाहनों का मूवमेंट और बाहरी ठेकेदारों की भूमिका पर पर्दा क्यों डाला जा रहा है? आखिर जंगल की संपदा पर यह खेल किसकी शह पर चल रहा है?
तराई के जंगलों में चल रहे इस कथित खेल ने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या प्लॉट सफाई अब वन तस्करी का नया पासवर्ड बन चुकी है? और क्या चैक पोस्टें निगरानी के लिए हैं या फिर सिर्फ दिखावे के लिए है।












