अरुण कुमार की रिपोर्ट :उत्तराखण्ड उजाला
किच्छा (उधम सिंह नगर)। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस के पीछे गौला नदी मे अवैध खनन का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। किच्छा क्षेत्र के पुलभट्टा के निकट, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस के समीप गौला नदी के भीतर मानकों और नियमों को दरकिनार कर खनन किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ता का कहना है कि यहां बिना धर्मकांटे के, केवल छन्ना लगाकर नदी से रेत का खनन किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर खनन नियमों का उल्लंघन है। शिकायत के अनुसार, खनन कार्य में न तो धर्मकांटे का उपयोग किया जा रहा है और न ही निकाले जा रहे उपखनिज की मात्रा का कोई आधिकारिक लेखा-जोखा रखा जा रहा है। इससे आशंका जताई जा रही है कि निर्धारित सीमा से कहीं अधिक मात्रा में रेत का दोहन किया जा रहा है। नियमों के अनुसार, नदी से निकलने वाले उपखनिज को तय मानकों और सीमित मात्रा में ही निकाला जाना चाहिए, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बना रहे और नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे इस प्रकार के खनन से गौला नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है। नदी के तल में गहरे गड्ढे बन रहे हैं, जिससे बरसात के मौसम में कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, नदी के किनारे बसे गांवों और खेती योग्य भूमि पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित विभागों की अनदेखी के कारण खनन माफिया बेखौफ होकर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने प्रशासन और खनन विभाग से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि खनन किस अनुमति के तहत किया जा रहा है, धर्मकांटे का उपयोग क्यों नहीं हो रहा है और प्रतिदिन कितनी मात्रा में रेत का खनन किया जा रहा है। यदि खनन नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अवैध खनन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि नदी में अनियंत्रित और अवैध खनन से न केवल जलस्तर प्रभावित होता है, बल्कि जलीय जीव-जंतुओं और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को भी भारी नुकसान पहुंचता है। सरकार द्वारा बनाए गए नियमों का उद्देश्य केवल राजस्व प्राप्त करना नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी है। ऐसे में नियमों की अनदेखी भविष्य के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है। फिलहाल, यह मामला प्रशासन और खनन विभाग के संज्ञान में लाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि जांच के बाद अवैध खनन पर अंकुश लगेगा और गौला नदी को और अधिक नुकसान से बचाया जा सकेगा। अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस शिकायत पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और क्या वास्तव में नियमों का पालन सुनिश्चित हो पाता है या नहीं









